Thursday, April 26, 2007

Wednesday, March 21, 2007

आठ

अब हम से मत पूछो

ब्लोग ६

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

पांच

मेर लाज्द ओज पे न्व्प new प्रेवो न३र्प् फ्न्रे' फक new पोवेफ

ल्कज्द्ल न

कल वेफ्द एप्ज्र ओ ओ इरे हरे क्व्फ

लाल्कदे

कल्दास ए ओइफंह न्ब्फ्र्विफ्ज न ओहरी पोएर प्रेज रो रत गर ए

Wednesday, March 7, 2007

कितना

अभी से मैं चल रह हूँ...
कोई रोके ना कोई टोके ...

कारवां गुज़र गया

स्वप्न झरे फूल से, गीत चुभे शूल से
लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे ।