Wednesday, March 21, 2007
Wednesday, March 7, 2007
कारवां गुज़र गया
स्वप्न झरे फूल से, गीत चुभे शूल से
लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे ।
लुट गए सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे ।
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